DHANVANTARI JAYANTI /DHANTRAYODASHI

भगवान धन्वन्तरी विष्णुजी के १२ वे अवतार है, जो कृतयुग मे समुद्रमंथन से अवतीर्ण हुये १३ वे रत्न है. भगवान धन्वन्तरी अपने बाये हाथ मे अमृत का कलश धारण किया है

अश्विन मास कृष्ण १३ ये भगवान धन्वन्तरीप्रकट दिन है

भगवान धन्वन्तरी का वाहन कमल है और उन्हें पितल का धातु प्रिय है

भगवान धन्वन्तरी को धने और खील का प्रसाद प्रिय है

भारत वर्ष मे भगवान धन्वन्तरी के १९ प्राचीन मंदिर है

भगवान धन्वन्तरी विष्णु का एक अवतार है जो पहली बार क्षीरसागर मंथन के दौरान अमृत को देवताओं को देने के लिए प्रकट हुए।

भगवान धन्वन्तरी कों आयुर्वेद के जनक के रूप में जाना जाता है। भगवान धन्वन्तरी मनुष्यों के बीच अपना ज्ञान प्रदान करने वाले पहले दिव्य अवतार थे।

धन्वन्तरीको चार हाथों वाले विष्णु के रूप में दर्शाया गया है, जिसमें शंख, चक्र, जलुकाऔर अमृता का पात्र है।

प्रार्थना की पहली पंक्ति में 4 साधनों का वर्णन है, जो धनवंतरी धारण करते हैं – अर्थात्- शंख, चक्र, जलुका, अमृत घट। ये ४ चीजें व्यक्ति के स्वास्थ्य को बनाए रखने और विभिन्न रोगों से छुटकारा पाने के लिए औजार की तरह हैं।

यहाँ हम ‘शंख’ का अर्थ है सुखद ध्वनि है। मंदिर में किसी भी अनुष्ठान की शुरुआत से पहले शंख फूंका जाता है। शंख उन सभी हानिकारक चीजों से सुरक्षा प्रदान करता है जो वायु के माध्यम से फैलती हैं। शंख ध्वनि कंपन और मंत्र चिकित्सा के भी महत्व को इंगित करता है।

चक्र, यानी सुदर्शन चक्र का उल्लेख भगवान कृष्ण द्वारा युद्ध में बुरे लोगों को मारने के लिए एक हथियार के रूप में किया गया है। गंभीर रोगों मे वैद्य के पास उसकी बुद्धि ही उसकी ताकत होती है, जिससे वह रोग विकृति को मार सकता है या नियंत्रित कर सकता है।

‘जलुका’ का इस्तेमाल आयुर्वेद में विषाक्त रक्त को निकालने के लिए किया जाता है। आयुर्वेद में वर्णित सभी पंचकर्म का प्रतिनिधित्व है।

अमृता घट या अमृत का पात्र, जो अमर जीवन के लिए पिया जाता है। ये पात्र रोगों को नियंत्रित करने और रोगी को अधिक और बेहतर जीवन देने के लिए वैद्य की दवाओं का प्रतिनिधित्व करता है।

धन्वन्तरीकी आंखों की तुलना कमल की सुंदरता से की जाती है।

धनवंतरी की त्वचा का रंग और पोशाक वर्णित है। भगवान धनवंतरी का प्रकट होना सुखद है। उनका रंग उज्ज्वल और चमकदार है। वह मुलायम और साफ चमकीले पीले रंग के कपड़े पहनते हैं।

जैसे जंगल की आग (संस्कृत में इसे वडवानल कहा जाता है) पूरे जंगल को नष्ट कर देती है, इसी तरह, भगवान धन्वंतरि शरीर से रोगों को नष्ट करने की क्षमता रखते हैं। इसलिए हम भगवान धन्वंतरि को प्रणाम करते हैं और शरीर से रोगों को नष्ट करने की ऐसी क्षमता प्राप्त करने की प्रार्थना करते हैं। तो हम भगवान धन्वंतरि को प्रणाम करते हैं और उनके जैसे व्यक्तित्व, ज्ञान और कौशल प्राप्त करने के लिए प्रार्थना करते हैं !!

धनतेरस के दिन, स्वास्थ्य के देवता धन्वन्तरीका जन्मदिन समारोह उत्साहपूर्ण और रमणीय वातावरण में होता है। आयुर्वेद के चिकित्सकों द्वारा धनवंतरी जयंती पूरे भारत में मनाई जाती है।

भारत सरकार ने घोषणा की है कि “धनवंतरी त्रयोदशी” पर हर साल “राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस” के रूप में मनाया जाता है।

जो धन्वन्तरीके नाम का स्मरण करता है, उसे सभी रोगों से मुक्त किया जा सकता है।

भगवान धन्वन्तरीको चिकित्सा के देवता के रूप में पूजा जाता है।

भगवान धन्वंतरि हम सभी कों निरोगी दीर्घायु दे !!

ॐ नमो भगवते धन्वन्तरये

अमृतकलेशहस्ताय

सर्वामयविनाशनाय

त्रिलोकनाथाय

श्री महाविष्णवे नम ।

वैद्य.हर्षल नेमाडे

वेदाकेअर आयुर्वेद,

पुणे.

०२०४८६०४०३९

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